मंगलवार, 17 मई 2011

डॉ.रघुवंश- Dr. Raghuvansh



२२वाँ मूर्तिदेवी पुरस्कार- डॉ. रघुवंश को

अपनी विकलांगता के कारण पैर से लिखने वाले प्रसिद्ध समाजवादी विचारक एवं लेखक डॉ.रघुवंश को १६ मई २०११ को नई दिल्ली में भारतीय ज्ञानपीठ के २२वें मूर्तिदेवी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।  उपराष्ट्रपति डॉ. हामिद अंसारी ने विज्ञान भवन में ९० वर्षीय डॉ. रघुवंश को दो लाख रुपये, प्रशस्ति पत्र, सरस्वती की प्रतिमा तथा ताम्र पट्टिका का यह पुरस्कार प्रदान किया।  

३० जून १९२१ को उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले के गोपामऊ कस्बे में जन्में डॉ. रघुवंश को उनकी पुस्तक ‘पश्चिमी भौतिकी संस्कृति का उत्थान और पतन’ पर यह पुरस्कार प्रदान किया गया है।  इलाहाबाद विश्वविद्यालय में १९८१ में हिन्दी विभाग के अध्यक्ष पद से सेवानिवृत डॉ. रघुवंश को अपातकाल के दौरान बिजली का तार काटने के झूठे आरोप में फंसा कर जेल भेज दिया गया था।  वे बचपन से ही विकलांग होने के कारण पैरों में पेन फंसा कर लिखते रहे और अब तक उनकी २६ पुस्तकें छप चुकी हैं।  

उपराष्ट्रपति डॉ. अंसारी ने डॉ. रघुवंश की शारीरिक विकलांगता की चर्चा करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी जिन्दगी से साबित कर दिया कि मनुष्य अपने हौसले से शरीर को जीत सकता है।  उनकी जिन्दगी की कहानी सुनकर ताज्जुब होता है पर उन्होंने अपनी दृढ इच्छाशक्ति से जो काम किया उसे पूरे देश ने मान लिया है।  डॉ. अंसारी ने बाज़ार के इस युग में आर्थिक मनुष्य की अपेक्षा सांस्कृतिक मनुष्य पर जोर देते हुए कहा कि तेज़ी से बढ़ती दुनिया में टेक्नालॉजी के फायदे हैं, पर भारतीय संस्कृति के शाश्वत मूल्यों को हम भूल गए तो हम किसी दुनिया के नहीं रह जाएंगे और पैर फिसला तो हम संस्कृति के मामले में कहीं के नहीं रह जाएंगे।

इसके पूर्व डॉ. रघुवंश के वक्तव्य को उनकी पुत्री ने पढ़कर सुनाया क्योंकि वह अपने स्वास्थ के कारण खुद मंच पर पढ़ने की स्थिति में नहीं थे। समस्त ब्लाग जगत की ओर से हम डॉ. रघुवंश को मूर्तिदेवी पुरस्कार से सम्मानित होने पर बधाई देते हुए उनके पूर्ण स्वस्थ होने और लम्बी आयु की कामना करते हैं॥

[समाचार व चित्र दिनांक १७ मई २०११ के दैनिक पत्र ‘स्वतंत्र वार्ता’ (हैदराबाद) से साभार]  

12 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

डा० रघुवंश जी के बारे में जानकारी अच्छी लगी ...


मेरे ब्लॉग पर आने के लिए आभार ... यूँ ही अपना स्नेह बनाये रखें .. आपकी टिप्पणी पा कर कृतज्ञ हूँ ...

सञ्जय झा ने कहा…

chutti me choote hue panno ko padhte yahan tak aa gaya...................

ab jari rahenge.......

pranam.

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

आभार परिचय का, बहुत बहुत बधाई।

सतीश सक्सेना ने कहा…

कमाल के व्यक्तित्व से परिचय कराया है आपने ! डॉ रंघुवंश विरले ही होते हैं ! ऐसे लोग मानव समाज को बरसों तक, सिखाने की ताकत रखते हैं ! इस शानदार व्यक्तित्व से परिचय कराने के लिए आपका आभार भाई जी !

Arvind Mishra ने कहा…

डॉ रघुवंश अप्रतिम बौद्धिक क्षमता और जीवट के व्यक्तिव हैं -मुझे गर्व है कि मैंने उन्हें देखा सुना है-उन्होंने कई कोशों -डिक्शनरियों का निर्माण किया -विज्ञान की पारिभाषिक शब्दावलियों पर भी काफी काम किया !
अभिनंदन !

ajit gupta ने कहा…

डॉ रघुवंश के कार्य को क्षितिज मिले यही कामना है। बधाई और शुभकामनाएं।

Suman ने कहा…

भारतीय संकृति के शास्वत मूल्यों को
हम भूल गए तो हम किसी दुनिया के नहीं रहेंगे !
बिलकुल सही Dr.रघुवंश जी को बहुत बधाई !
उनके स्वास्थ्य क़ी मंगल कामनाएं !
आभार भाई जी .........

डॉ टी एस दराल ने कहा…

देर से मिला , लेकिन दुरुस्त मिला ।
बहुत प्रेरणादायक जिंदगी रही डा० रघुवंश जी की ।
इस प्रस्तुति के लिए आभार ।

Sunil Kumar ने कहा…

डा० रघुवंश जी के बारे में जानकारी देने के लिए आभार......

राज भाटिय़ा ने कहा…

डा० रघुवंश जी के बारे में बहुत अच्छी जानकारी,
धन्यवाद

Amrita Tanmay ने कहा…

पढ़ते-पढ़ते संकल्प दृढ होने लगा .प्रभावी पोस्ट तो है ही साथ ही रघुवंश जी के लिए मस्तक झुकता गया ..आभार

ZEAL ने कहा…

आभार इतने बड़े व्यक्तित्व से परिचय कराने का। प्रेरणादायी व्यक्तित्व।