पिछली पोस्ट पर की गई टिप्पणियों में स्त्री सशक्तीकरण के कुछ मुद्दे उठाए गए जिन पर विस्तृत चर्चा हो सकती है। इसी क्रम में कुछ टिप्पणियों पर विमर्श--
पी.सी.गोदियाल जी ने बताया कि जिन पर यह ज़िम्मेदारी [स्त्री शिक्षा की] है, वही लोग लड़कियों के स्कूलों को बमों से उडा़ रहे हैं। निश्चय ही यह इशारा उन लोगों की ओर है जो महिलाओं को अशिक्षित रखकर उन्हें पुरुषों के ताबे बनाए रखना चाहते हैं। हमने इसका एक उदाहरण अपनी पिछली पोस्ट में अफ़गानिस्तान में पारित एक विधेयक के माध्यम से दिया ही है।
डॊ. टी.एस.दराल जी ने कहा है कि इस मामले में हम विकसित देशों को दोष नहीं दे सकते। प्रायः यह देखा गया है कि सम्पन्न घरानों में परिवार नियोजन हो रहा है जब कि समाज का गरीब तबका़ इसके उल्लंघन मे ही अधिक दिखाई देता है। अशिक्षा के कारण वे अपनी परिस्थितियों को ईश्वर के भरोसे छोड़ देते हैं, ‘भगवान की मर्ज़ी’ कहते हुए। यही बात गरीब देशों पर भी लागू होती है, जो परिवार नियोजन जैसी योजनाओं की अनदेखी करते हैं।
डॊ. महेश सिन्हा जी को लगता है कि भूख से ही जनसंख्या कम हो जाएगी। यह मानना इसलिए गलत है कि भूखे रहते हुए भी सोमालिया जैसे देश में अधिक जन संख्या है। इस भूख के कारण ही वे लुटेरे बन चुके है और अब विश्व जहाज़रानी के लिए एक बड़ा खतरा बनते जा रहे हैं।
रचना जी को यह भय है कि जब स्त्री शिक्षित हो जाएगी तो वह अपनी शिक्षा का उपयोग स्त्री सशक्तीकरण के लिए करेगी जिसे पुरुष बर्दाश्त नहीं कर सकेगा। वे समझती हैं कि शिक्षा का ‘दुर्गुण’ जागृति लाएगा, इसलिए नारी को अशिक्षित रखना ही पुरुष के हित में है। शायद रचना जी शिक्षा, संस्कृति, संस्कार, सभ्यता और स्त्री स्वतंत्रता को सही परिप्रेक्ष्य में नहीं ले पाईं। स्त्री की स्वतंत्रता किससे? पिता, पुत्र, पति, भाई, सखा.... परिवार से!!!
यहाँ डॊ. ऋषभ देव शर्मा जी की टिप्पणी से कदाचित समाधान मिले। शर्माजी ने कहा है कि "सुशिक्षा होना सशक्त होना भी है। इसीलिए तो कुशिक्षित करने पर ज़ोर है।" कुशिक्षा का ही परिणाम है कि हम मानवीय मूल्य, संस्कार, संस्कृति, सभ्यता, परिवार, प्रेम.... से परे हटते जा रहे हैं। स्त्री-पुरुष को एक दूसरे का पूरक समझने की बजाय प्रतिद्वन्द्वि समझा जा रहा है। ‘अहम् ब्रह्मास्मि’ का मंत्र जपा जा रहा है।
इस संदर्भ में ज्ञानदत्त पाण्डेय जी की टिप्पणी पर ध्यान दिया जा सकता है कि "प्रगति करनी है तो माँ को शिक्षित करना होगा।" तभी तो कहा जाता है - THE HAND THAT ROCKS THE CRADLE RULES THE WORLD.