शनिवार, 18 जुलाई 2009

मौत सामने थी....

विमान में छेद और मौत सामने थी

यह एक सच्चाई है कि आदमी कभी यह नहीं सोचता कि किस पल कहाँ मौत उसके सामने आ खड़ी हो जाएगी! इसे भी भाग्य का खेल कहा जाएगा कि कोई-कोई मौत के मुँह से निकल कर आ जाता है। और...वह जब ऐसी घटना से उबरता होगा तो उसकी क्या मानसिकता होगी?

हाल ही में ब्रायन कनिंगघम को एक ऐसी ही घटना से गुज़रना पड़ा था जब उसने मौत को बिलकुल निकट से देखा। यह हादसा उस समय घटा जब अमेरिका के नैशविले से बाल्टीमोर जा रहे बोइंग-७३७ को आपात स्थिति में पश्चिम वर्जीनिया के चार्ल्सटन में उतरना पडा़।

विमान जब ज़मीन से सैकड़ों फ़ीट की ऊँचाई पर था तो पता चला कि यात्रियों के कैबिन में फुटबाल जितना छेद हो गया है। विमान में सवार ब्रायन उस समय सो रहा था। जब उसने यकायक लोगों का शोर-गुल सुना तो उसे कुछ समझ में नहीं आया कि क्या हो रहा है। सूर्य की किरणे सीलिंग से आ रही थीं। उसे आसमान साफ़ दिखाई दे रहा था और उसके सीट के ऊपर ही विमान में छेद हो गया था। विमान के भीतर हवा का दबाव बढ़ता जा रहा था। सभी लोग बेहद डरे हुए थे परंतु शांत थे। उन्हें परिचालकों ने ढाढ़स बंधाया और ओक्सिजन मास्क पहनने की हिदायत दी। पायलेट ने अपने कौशल से विमान को सुरक्षित ज़मीन पर उतार दिया।

ब्रायन जैसे लोग जिन्होंने इस घटना को झेला है, वे विमान में जब भी सवार होंगे, न जाने किस मानसिकता से गुज़र रहे होंगे, शायद वे भी बयान नहीं कर पायेंगे!!

5 टिप्‍पणियां:

संगीता पुरी ने कहा…

अचानक जीवन का खतरा .. पता नहीं कैसा महसूस होता होगा ?

Udan Tashtari ने कहा…

निश्चित ही उस मानसिकता को आंक पाना भी संभव नहीं..जब तो खुद न गुजरो.

ओम आर्य ने कहा…

sahi hai

विवेक सिंह ने कहा…

ऐसी स्थिति ईश्वर न पैदा करें !

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey ने कहा…

कई लोग अपने को अपने शरीर से अलग देखने की अनुभूति की बातें करते हैं।
मेरे एक मित्र ने भी ऐसा कहा था अपने बारे में। जैसे वह त्रैविम से चतुर्विम का प्राणी हो गया हो।
यह पढ़ते यूंही याद आया।