शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2012

अमृत महोत्सव


डॉ.गार्गीशरण मिश्र ‘मराल’ का अमृत महोत्सव

कोई व्यक्ति जब ७५ वर्ष की आयु पर पहुँचता है तो उसके अपनों के लिए यह एक पर्व का अवसर बन जाता है।  ऐसा ही अवसर था वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. गार्गीशरण मिश्र ‘मराल’ का अमृत महोत्सव जो जबलपुर में ४ नवम्बर २०११ को सम्पन्न हुआ।   उनका साहित्यिक फलक इतना विस्तृत था कि इस अवसर पर निकाले गए अभिनंदन ग्रंथ की पृष्ठ संख्या ४०० तक पहुँच गई।  इस अभिनंदन ग्रंथ के सम्पादक हैं आचार्य भगवत दूबे और सम्पादक मंडल के अन्य सदस्य हैं प्रो. जवाहरलाल ‘तरुण’, डॉ.राजकुमार ‘सुमित्र’, डॉ. हरिशंकर दुबे तथा राजेश पाठक ‘प्रवीण’।

जबलपुर को भारत की संस्कारधानी का नाम दिया गया है।  इस अभिनंदन ग्रंथ के संपादकीय में आचार्य भगवत दूबे कहते हैं कि ‘महर्षि जाबालि की तपोभूमि यह नर्मदांचली संस्कारधानी जबलपुर प्रचुर सारस्वत संपदा से सदैव सम्पन्न रही है।  जबलपुर का यह सौभाग्य है कि यहाँ संस्कृत के उद्भव विद्वान महाकवि राजशेखर, प्रसिद्ध वैयाकरण श्री कामता प्रसाद ‘गुरु’, राष्ट्रभक्ति की संवाहिका कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान, शताधिक नाटकों के रचयिता हिंदी के प्रबल पक्षधर सांसद सेठ गोविंददास, कृष्णायन के रचयिता पं. द्वारिका प्रसाद मिश्र, कविवर रामेश्वर शुक्ल ‘अंचल’ एवं व्यंग्यविधा के जनक श्री हरिशंकर परसाईं जैसे सुविख्यात सृजनधर्मी हुए हैं।... उन्हीं में से एक हैं ‘कादम्बरी’ संस्था के अध्यक्ष, शिक्षाविद एवं यशस्वी साहित्यकार डॉ. गार्गीशरण मिश्र ‘मराल’ जो साहित्य की गद्य एवं पद्य दोनों विधाओं के पारंगत पुरोधा है।"

डॉ. गार्गीशरण मिश्र ‘मराल’ न केवल एक उच्च कोटि के शिक्षक रहे, बल्कि अपनी कलम का लोहा मनवा चुके हैं, साथ ही वे सामाजिक कार्यों में भी अपना योगदान दे रहे हैं। वे प्रसिद्ध सामाजिक संस्था रोटरी क्लब तथा संस्कारधानी की प्रसिद्ध साहित्यिक संस्था ‘कादम्बरी’ के अध्यक्ष  हैं।  इस अभिनंदन ग्रंथ से डॉ. गार्गीशरण मिश्र ‘मराल’ के बहुआयामी व्यक्तित्व का पता चलता है।

हम डॉ. गार्गीशरण मिश्र ‘मराल’ की लम्बी आयु के साथ साथ उनके स्वस्थ व सानंद जीवन की कामना करते हैं।



12 टिप्‍पणियां:

dheerendra ने कहा…

डा०गार्गी शरण मिश्र जी परिचय कराने के लिए बहुत२ आभार,ईश्वर उन्हें लंबी आयु पदान करे
लाजबाब प्रस्तुती .

MY NEW POST ...40,वीं वैवाहिक वर्षगाँठ-पर...

प्रवीण पाण्डेय ने कहा…

ईश्वर उन्हें स्वस्थ भविष्य दे..

ZEAL ने कहा…

हम डॉ. गार्गीशरण मिश्र ‘मराल’ की लम्बी आयु के साथ साथ उनके स्वस्थ व सानंद जीवन की कामना करते हैं।

.

Suman ने कहा…

हम डॉ. गार्गीशरण मिश्र ‘मराल’ की लम्बी आयु के साथ साथ उनके स्वस्थ व सानंद जीवन की कामना करते हैं।
बढ़िया पोस्ट आभार !

डॉ॰ मोनिका शर्मा ने कहा…

उन्हें हार्दिक शुभकामनायें

पी.सी.गोदियाल "परचेत" ने कहा…

हम भी डॉ. गार्गीशरण मिश्र ‘मराल’ की लम्बी आयु के साथ साथ उन्हें शुभकामनाये देते है !

डॉ टी एस दराल ने कहा…

डॉ गार्गीशरण मिश्र ‘मराल’ जी को जन्मदिन की डायमंड जुबली के लिए हार्दिक बधाई और शुभकामनायें ।

Naveen Mani Tripathi ने कहा…

Mishr ji ke deerghayu hone ki kamana karata hoon ...parichay ke liye sadar abhar.

Amrita Tanmay ने कहा…

रोचक जानकारी ।

Murari Pareek ने कहा…

श्री डा०गार्गी शरणजी की रचनाओं का सिलसिला चलता रहे ...शुभकामनाए...

दिगम्बर नासवा ने कहा…

आभार इस परिचय का ... इश्वर उनको लंबी आयु प्रदान करे ..

महेन्द्र मिश्र ने कहा…

आदरणीय गार्गीशरण जी मिश्र "मराल" जी जबलपुर संस्कारधानी के जाने माने वरिष्ठ साहित्यकार हैं उनके बारे में सारगर्वित आलेख पढ़कर सुखद अनुभूति का अनुभव हो रहा है इस हेतु आप धन्यवाद के पात्र हैं . हम जबलपुरिया ब्लागर्स आपके आभारी हैं .... आभार