‘झूठा सच’ में मानसिकता का चित्रण
"तेरे लिए हिंदू ऐसा कहें तो कैसा लगे? औरत को तो औरत का दरद होना चाहिए। खुदा न करे तू किसी ऐसे के बस में पड़ जाए। अल्ला-ताला ने हिंदू-मुसलमान मर्दों में तो फ़रक किया है, औरतों में तो उसने भी कोई फरक नहीं रखा।"
"मरे आपस में लड़ते हैं, मिट्टी औरतों की खराब होती है।"
"खुदावन्द ने तो मर्द पर फ़र्ज़ आयद किया है कि औरत पर रहम करे और उसकी हिफ़ाज़त करे क्योंकि औरत मर्द को अपने जिस्म से पैदा करती है और पालती है।"
"खाक रहम और हिफ़ाज़त करते हैं। बेहया जहाँ से निकलते हैं, उसी को बेइज़्ज़त करते हैं। मर्द मुहब्बत करे तो, गुस्सा करे तो, उनका तो सब ज़ोर वहीं उतरता है।"
तारा ऐसी बातों को सुनती रहती और सोचती रहती कि स्त्री को पर्दे और बुर्के में बंद रखनेवाले, मर्दों के सामने आने का हक न रखनेवाली स्त्रियों की स्वतंत्रता और मर्दों से समता की बातें कितनी अनर्गल है। इन बातों का असर तारा पर नहीं होता है और जब हाफिज़ जी के पर भी वो इस्लाम कुबूल नहीं करने की इच्छा व्यक्त करती है तो हाफिज़ जी की बहू कहती है-